बैंक हारा, धर्म जीता
धर्म में सबसे ज़्यादा पावर है। पावर स्टार पवन सिंह से भी ज़्यादा।

धर्म में सबसे ज़्यादा पावर है।
पावर स्टार पवन सिंह से भी ज़्यादा।
सबसे बड़ी आर्मी है—
एल-विश यादव की आर्मी भी धर्म की आर्मी का बस एक छोटा-सा प्लाटून है।
ख़ैर,
रोज़ फोन आता था—
क्रेडिट कार्ड कंपनी वाली दीदी का।
“सर, ले लो क्रेडिट कार्ड, मस्त ऑफ़र है!”
मैं उनके प्रोफेशन का सम्मान करता हूँ।
इसलिए फोन काट देने के बजाय शालीनता से कहता था—
“सॉरी मैडम, अभी नहीं चाहिए।”
लेकिन फिर भी—
एक-दो मिनट तक उनके सारे प्रोफेशनल हथियार चल ही जाते—
“ले लीजिए सर, बैंक मेहरबान है।
पैसा ही पैसा है उस पर,
अपने घर से दे रहा है!”
आज मैंने धर्म की ताक़त को प्रयोग में लाने का निश्चय किया।
मैंने कहा—
“मैडम, नवरात्रि शुरू हो गई है।
मैं गर्ग गोत्रीय ब्राह्मण हूँ।
आज माता शैलपुत्री का दिन है।
नवरात्रि में मैं कर्ज़ लेने की बात नहीं करता।”
मैडम ने हथियार डाल दिए।
इस बार उनके मुँह से
एक भी “लेकिन सर…” नहीं निकला।
बैंक हारा।
धर्म जीता।
अब मैडम ने
नौ दिन बाद फोन करने का वादा किया है।